Friday, May 15, 2009

यादें !!!!

रोज सुबह जब तुम प्राण प्रिय गागर भरने आती हो ,
अपने कोमल कोमल कर कमलों से पानी को छलकाती हो ,
इस तामस भरे जीवन में तुम सुबह की किरने लाती हो ,
इस बंजर धारा पर तुम मधुर सुधा फैलाती हो ।

अजर अमर है छाया तेरी , अजर अमर है तेरा साया ,
पास बैठ मैं मदहोश पड़ा हु , देख ये तेरी निर्मल काया ,
असमंजस में है धरा सारी , असमंजस में ये संसार है ,
ख़तम न होते तेरे लिए शब्द , तू ही मेरा स्वप्न संसार है ।